Wednesday, January 10, 2018

जेल ब्रेक: एक छोटी सी कहानी

                                                                       (1)
सजलपुर का सेंट्रल जेल। दूर से ही जेल का विशाल आकार दिख जाता है। अब अंदर कैदी कैसे रहते होंगे। इसका आइडिया तो जेल के अंदर जाने पर ही होगा ना। जेल का अनुभव लेने टुन्ना सिंह पहुंचता है। जो अपहरण का आरोपी है। 

टुन्ना सिंह- किवाड़ खोलो भइया, हम भी आ गए तुम्हारे दर्शन को। अभी तक बाहर से ही जेल को देखते आ रहे थे, अब अंदर से भी जेल का जलवा देखेंगे। भइया ईमान से कहते हैं अंदर आकर हम भी सुधर जाएंगे। बस एक ही गुजारिश है कि सुधाने का जो-जो औजार है, उसके दर्शन जरूर करवा देना। 

पुलिस वाले टुन्ना सिंह को लेकर जेल के अंदर दाखिल हो जाते हैं।  
                                                            
                                                                        (2)

टुन्ना सिंह- बाप रे बाप, ई त भेड़-बकरी के जैसा जेल में आदमियों को ठूंस दिया है। बहुते गलत बात है। ऐसे इंसाफ दोगे। इससे से अच्छा तो ससुरा को गोली मार दो। (कुछ देर सोच कर) इतनी भीड़ देखकर ससुरा गोली की भी बोली बदल जाएगी। 
(साथ चल रहे पुलिसकर्मी से...)
टुन्ना सिंह- का...सही कह रहे हैं ना ?

(साथ में चल रहा पुलिसकर्मी कोई जवाब नहीं देता है। )

                                                                           (3)

जेल में टुन्ना सिंह को एक सिंगल कमरा मिलता है। उसमें दूसरा कोई कैदी नहीं है। 
टुन्ना सिंह- ससुरा जेल में ठूसम ठूस चल रहा है, लेकिन हमरे कमरा में साला हम ही है। कैइसा गजब का सिस्टम है भाई। चलो अकेले हरि भजन गाएंगे। 

                                                                           (4)
जेल के अंदर दो गुटों के बीच अचानक मारपीट शुरू हो जाती है। इसमें एक कैदी बुरी तरह से घायल हो जाता है। उसके शरीर से खून ज्यादा बह जाता है। उसे लेकर जेलकर्मी अस्पताल लेकर भागते हैं। अस्पताल में घायल कैदी को खून की जरूरत पड़ती है। घायल कैदी को A+ रक्त की आवश्यकता होती है। टुन्ना सिंह का भी खून A+ है। टुन्ना सिंह जेलकर्मी से बात करता है। 
टुन्ना सिंह- का भाई, हमरा भी खून A+ है, क्या हम खून दे सकते हैं?
जेलकर्मीः हां क्यों नहीं, रुको मैं जेलर साहब से बात करता हूं। 

                                                                            (5)  
जेलकर्मी जेलर के चेंबर में घुसता है। 
जेलकर्मी- सर अपहरण का एक विचाराधीन बंदी है जो अपना खून डोनेट करना चाहता है। उसके भी ब्लड का ग्रुप A+ है। इस समय मंगरु को खून की सख्त जरूरत है। 
जेलर रणविजय चौहान- तो किस बात का इंतजार कर रहे हो, उसे लेकर जल्दी अस्पताल पहुंचो ताकि समय पर उस घायल कैदी को खून मिल सके। 
जेलकर्मी- जी सर । हम जल्द ही निकलते हैं। 

                                                                             (6)
अस्पताल में मंगरु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उससे खून की सख्त जरूरत है। ऐन वक्त पर टुन्ना पहुंच जाता है और वो अपना खून डोनेट करता है। जिससे मंगरू की जान बच जाती है। ब्लड डोनेट करने के बाद टुन्ना सिंह जेल वापस लौट आता है। जहां उसके इस कदम की हर व्यक्ति तारीफ करता है। उसके इस कदम से जेल में उसके प्रति धारणा बदल जाती है। सब उसे नेक इंसान मानने लगते हैं।
एक कैदी- का हो टुन्ना बाबू, तुम तो मंगरु के लिए भगवान बन कर आए हो
टुन्ना- का कहत हो चाचा। इंसान इंसान के काम नहीं आएगा तो क्या जानवर आएगा। अरे भइया हम भी इंसान ही हूं। उ त अपहरण के झूठा केस में फंसा दिया है। वरना हम भी घर परिवार की देखरेख में लगे रहते।

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जेल प्रशासन कैदियों के आचरण में सुधार और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम बढ़ाता है। टुन्ना की पॉजीटिव इमेज को देखते हुए जेल प्रशासन उससे समोसे और पकौड़े की दुकान के काउंटर पर बिठा देता है। ये दुकान जेल प्रशासन के द्वा्रा संचालित होता है। काउंटर पर बैठते-बैठते कब एक महीना िबीत जाता है इसका पता भी नहीं चलता। जेल की चाहरदिवारी के बाहर संचालित इस दुकान पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। यानि कैदियों के द्वारा बनाए गए समोसे, पकौ

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जेल द्वा्रा संचालित दुकान पर भज्जिया और पकौड़ों की मांग बढ़ गई है। रविवार के दिन काफी संख्या में पब्लिक दुकान पर पहुंचती जा रही है। लिहाजा जेल के कई मिल-जुलकर भज्जिया और पकौड़े तलने में लगे हैं। भीड़ भज्जिया, समोसे और पकौड़े खाने में व्यस्त है। काउंटर पर कौन बैठा है इस पर किसी का ध्यान नहीं है। लेकिन जब धीरे-धीरे भीड़ घटने लगती है तो एक जेलकर्मी की नजर काउंटर पर जाती है। जहां टुन्ना सिंह गायब हो जाता है। जेलकर्मी जेलर को टुन्ना सिंह के गायब होने की सूचना देता है। जेलर को दुकान के काउंटर पर टुन्ना सिंह का लिखा एक लेटर मिलता है जिस पर लिखा होता है कि अपहरण के केस में वो जेल आया था, लेकिन आज खुद उसका ही अपहरण हो गया।

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